चुनावी साल से पहले 'मिनी इलेक्शन बजट' पर सबकी नजर
कोलकाता। महानगर की राजनीति और विकास योजनाओं के लिहाज से शुक्रवार, 13 फरवरी का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। दोपहर 2.30 बजे कोलकाता नगर निगम का बजट शहर के मेयर फिरहाद हाकिम पेश करेंगे। बजट सत्र पर विस्तृत चर्चा और समीक्षा 16 फरवरी (सोमवार) और 17 फरवरी (मंगलवार) को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक होगी। इस बार का बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज भर नहीं है, बल्कि इसे राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामने 2026 का विधानसभा चुनाव है और यदि सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार हुआ तो इसी साल दिसंबर के मध्य में कोलकाता नगर निगम के चुनाव भी हो सकते हैं। ऐसे में यह बजट सत्तारूढ़ बोर्ड के लिए जनता के सामने अपनी विकास योजनाओं और प्राथमिकताओं को प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर है। विशेषज्ञ इसे मिनी इलेक्शन बजट के तौर पर देख रहे हैं।नगर निगम सूत्रों के मुताबिक, इस बार का बजट शहरवासियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जा सकता है।
संभावना है कि बस्ती विकास, सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण, जलनिकासी व्यवस्था के आधुनिकीकरण और जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए अतिरिक्त राशि आवंटित की जाए। हर साल बरसात में शहर के कई हिस्सों में जलभराव बड़ी समस्या बन जाती है, ऐसे में ड्रेनेज सिस्टम सुधार इस बजट का प्रमुख एजेंडा हो सकता है। पेयजल आपूर्ति के लिए नई परियोजनाओं, पाइपलाइन विस्तार और जल गुणवत्ता सुधार पर भी फोकस रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही आधुनिक पार्किंग व्यवस्था, हॉर्डिंग और विज्ञापन प्रणाली के डिजिटलीकरण तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए पर्यावरण अनुकूल पहलों पर भी खर्च बढ़ाया जा सकता है।
हरित कोलकाता और स्वच्छता पर जोरशहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, सड़क किनारे वृक्षारोपण और पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए भी विशेष प्रावधान की संभावना है। आधुनिक वॉटर स्प्रिंकलर के जरिए धूल नियंत्रण और वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
कठोर अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) को अधिक वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाने की योजना भी बजट में शामिल हो सकती है। कचरा पृथक्करण, रीसाइक्लिंग और नए ट्रांसफर स्टेशन विकसित करने पर बल दिया जा सकता है। इसके अलावा कुछ व्यावसायिक परियोजनाओं के जरिए निगम की आय बढ़ाने का प्रयास भी देखने को मिल सकता है। हालांकि विकास योजनाओं के बीच निगम की वित्तीय स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों—2022-23, 2023-24 और 2024-25—में आय और व्यय के बीच घाटा दर्ज किया गया था। घाटा कम करने के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की गई थी, लेकिन उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका।
इस बार भी बजट में घाटा रहने की आशंका जताई जा रही है। नई संशोधित मूल्यांकन (रिवाइज्ड असेसमेंट) प्रणाली लागू होने के बावजूद संपत्ति कर की बकाया वसूली पूरी तरह सफल नहीं रही है। इसका सीधा असर निगम की आय पर पड़ा है। चुनाव से पहले जनहित योजनाओं और विकास कार्यों में खर्च बढ़ाने की संभावित योजना से वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि निगम आय के नए स्रोत कैसे विकसित करता है और घाटे को नियंत्रित करने के लिए क्या ठोस रणनीति अपनाता है। कुल मिलाकर, शुक्रवार को पेश होने वाला कोलकाता नगर निगम का बजट विकास, राजनीति और वित्तीय संतुलन—तीनों के बीच तालमेल की बड़ी परीक्षा साबित होगा। शहरवासियों की निगाहें अब मेयर के बजट भाषण पर टिकी हैं।